श्री राम नवमीं महोत्सव में सीता स्वयंवर कथा से श्री राम भवन में बना विवाहोत्सव का माहौल

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-माता सीता ने दिव्य शिव धनुष को बाएं हाथ से उठा लिया थाः स्वामी प्रकाशानंद सरस्वती

होशियारपुर (TTT)। श्री राम चरित मानस प्रचार मंडल की तरफ से श्री राम भवन चांद नगर बहादुरपुर में श्री श्री 1008 स्वामी प्रकाशानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में करवाए जा रहे 48वें श्री राम नवमीं महोत्सव के छठे दिन कथा करते हुए साध्वी किशोरी दासी जी (ग्वालियर वालों) ने भगवान राम विवाह की कथा का बहुत ही सुन्दर ढंग से वर्णन किया। कथा को आगे बढ़ाते हुए किशारी दासी ने कहा कि महर्षि विश्वामित्र जी के साथ भगवान राम व लक्ष्मण मिथिला पहुंचने एवं अशोक वाटिया प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि महर्षि के साथ भगवान राम एवं लक्ष्मण सीता स्वयंवर में पहुंचते हैं और वहां पर उपस्थित समस्त राजा एवं राजकुमार एक-एक करके शिव धनुष को तोड़ने का प्रयास करते हैं। लेकिन सभी असफल हो जाते हैं। इसके बाद भगवान जब महर्षि विश्वामित्र जी की आज्ञा से धनुष को उठाने के लिए खड़े होते हैं तो उनके संस्कारों एवं गुरु वंदन को देखकर सभी चकित रह जाते हैं। गुरु जी की आज्ञा से भगवान राम ने धनुष को बहुत ही सहज स्वभाव से उठा लिया और जब वह उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तो वह टूट गया। शिव धनुष के टूटने पर तीनों लोक हिल उठे और देवताओं ने भगवान राम पर पुष्पों की वर्षा की। इस दौरान उन्होंने शिव धनुष टूटने के बाद जनकपुरी पहुंचे भगवान परषुराम और भगवान राम के बीच हुए संवाद का व्याख्यान किया। कथा के दौरान साध्वी जी ने सीता स्वयंवर पर सुन्दर भजन गाकर श्रद्धालुओ को भावविभोर कर दिया। इस उत्सव से श्री राम भवन जनकपुरी सी प्रतीत होने लगा और सभी पुष्पवर्षा करने लगे तथा मंगल गीतों पर झूमने लगे। सखियों ने मंगलगीत गाकर भगवान श्रीराम को जयमाला पहनाने के लिए माता सीता को कहा। माता सीता ने श्री राम के गले में वरमाला डालकर स्वयंवर विधि को पूरा किया।

इस अवसर पर आशीर्वाद प्रदान करते हुए स्वामी प्रकाशानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि राजा जनक बहुत ही ज्ञानवान और विद्वान थे। उन्होंने माता सीता को धरती से प्राप्त किया था। जब उन्हें शिव धनुष मिला तो बचपन में ही माता सीता ने उस धनुष को बाएं हाथ से उठा लिया था। इस दृश्य को देखकर राजा जनक समझ गए थे कि सीता साधारण नहीं हैं। क्योंकि, यह धनुष बहुत ही दिव्य है और सीता ने इसे बाएं हाथ से उठा लिया, इसलिए यह भी दिव्य है। तभी से उन्होंने सोच लिया था कि वह सीता केबड़े होने पर धनुष यज्ञ करवाएंगे यानि जो इस धनुष तो उठाएगा व तोड़ेगा उसी से सीता का विवाह किया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्री राम चरितमानस को पढ़ने और सुनने मात्र से ही जीवन बंधनों से मुक्त हो जाता है और साध्वी किशोरी दासी जी द्वारा बहुत ही सुन्दर ढंग से श्री राम चरित मानस का पाठ श्रवण करवाया जा रहा है वह अद्भुत है और हम भाग्यशाली हैं कि हमें यह सुअवसर प्राप्त हुआ है। इस मौके पर बैकफिंको पंजाब चेयरमैन संदीप सैनी, भाजपा जिला प्रधान निपुण शर्मा, प्रमुख समाज सेवी संजीव अरोड़ा, प्रमोद शर्मा, विनोद कपूर, जिंदू सैनी, डा. सैलेश, विजय विग, संदीप शर्मा, रमेश खोसला, दिनेश कुमार नंद, राजीव सिंगला संजू, महिदंरपाल गुप्ता, रमन वर्मा, एमपी गौतम, तिलक राज वर्मा, जेके शर्मा, राम कृष्ण, राजीव भाटिया सहित मंडल के समस्त सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

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