
होशियारपुरः (TTT) आज यहां बहु-रंग कलामंच होशियारपुर की ओर से 63वें ’’विश्व रंग-मंच दिवस’’ के अवसर पर रंगमंच की मशहूर शख्सियत डॉ. जनमीत के साथ हैरीटेज़ होम कोलपुर के नज़दीक दसूहा में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता डॉ. जनमीत जी के साथ कलाकार निर्देशक अशोक पुरी, गुरमेल धालीवाल, विवेक हाशिर ने की। इस प्रोग्राम के सूत्रधार एैली राकेश कुमार डिस्ट्रिक गर्वनर थे।
’’विश्व रंग-मंच दिवस’’ की गोष्ठी के आरंभ में निर्देशक अशोक पुरी ने 1962 से शुरू हुये विश्व रंग-मंच दिवस में 1989 से बहुरंग कला-मंच द्वारा किये प्रोग्रामों की जानकारी देने के उपरांत पंजाब रंगमंच में होशियारपुर के जोगिन्दर बाहरला तथा चरनदास सिद्धू की ओर से डाले गये योगदान तथा अगली पीढ़ी द्वारा मंचन तथा अकादमिक नाटक के लिये डॉ. जनमीत द्वारा दिये गये योगदान की जानकारी दी।
इस अवसर पर डॉ. जनमीत ने बताया कि किसी भी भाषा के नाटक मंचन होने तक अधूरे होते हैं, पर पंजाबी नाटक में आई.सी.नंदा से शुरू होकर इप्टा, पलस तथा बलवन्त गार्गी, हरपाल टिवाणा की ओर से शुरू किये अपने-अपने प्रयासों के साथ पंजाबी रंग-मंच को आज के युग तक ले आया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने गुरू नानक देव युनिवर्सिटी की फैलोशिप के साथ सबसे पहले पंजाबी रंगमंच का 1947 तक का इतिहास लिखा है।
इस अवसर पर उन्होंने होशियारपुर (दोआबा) में बहुरंग कला मंच ने अशोक पुरी के निर्देशन में एक ठोस प्रयास किया है जिसके लिये इनके काम को भी भुलाया नही जा सकता। इस अवसर पर अलग-अलग रंगकर्मियों द्वारा उठाये गये सवालों का भी डॉ.जनमीत ने निवारण किया। प्रोग्राम के अन्त में बहु-रंग कलामंच होशियारपुर की ओर से डॉ.अशोक पुरी, गुरमेल धालीवाल, विवेक हाशिर तथा एैली राकेश कुमार ने डॉ. जनमीत को दोशाला तथा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।


