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कुष्ठ रोग पिछले जन्मों का अभिशाप नहीं है, यह एक बीमारी है जिसका सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज होता है: जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. रॉबिन
होशियारपुर 13 फरवरी 2025(TTT ): सिविल सर्जन होशियारपुर डॉ. पवन कुमार शगोत्रा के दिशा-निर्देशानुसार तथा कुष्ठ रोग कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. रोबिन साहनी के कुशल नेतृत्व में एसडी कॉलेज होशियारपुर में कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता लाने के लिए श्री अशोक पुरी के ‘बहुरंग कला मंच’ के कलाकारों द्वारा एक नुक्कड़ नाटक का खेला गया, जिसका आयोजन मीडिया विंग होशियारपुर द्वारा कॉलेज प्रबंधन अध्यक्ष श्रीमती हेमा शर्मा, सचिव श्री गोपाल, संयुक्त सचिव श्री तिलक राज ,प्रिंसिपल डॉ. सविता गुप्ता और एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती मनप्रीत कौर के सहयोग से किया गया।
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इस अवसर पर कुष्ठ रोग के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. रोबिन ने कहा कि कुष्ठ रोग कोई पूर्व जन्म का पाप नहीं है, बल्कि एक ऐसा रोग है जिसका पूर्णतः उपचार संभव है। कुष्ठ रोग माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु द्वारा फैलने वाला रोग है। यह एक संक्रामक रोग है जो खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के संक्रमण के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है और किसी भी उम्र में हो सकता है। हमें कुष्ठ रोग से पीड़ित किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए, बल्कि हर संभव तरीके से उनकी मदद करनी चाहिए। उन्होंने कुष्ठ रोग के लक्षणों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि त्वचा पर हल्के पीले तांबे के रंग या लाल धब्बे कुष्ठ रोग का संकेत हैं।सुन्नपन त्वचा के नीचे की नसों को क्षति पहुंचने के कारण होता है। इस रोग के कारण तंत्रिकाएं मोटी और कठोर हो जाती हैं। रोगी को कुष्ठ रोग से प्रभावित क्षेत्र पर किसी प्रकार का दर्द या चोट महसूस नहीं होती है। मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं, जिससे शरीर के अंग मुड़ जाते हैं और सुन्न होने के कारण ये अंग कभी-कभी चोट लगने पर शरीर से अलग हो जाते हैं। लेकिन इस बीमारी का इलाज संभव है और सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज बिल्कुल मुफ्त किया जाता है। बहु-औषधि चिकित्सा यानि एम.डी.टी. से कुष्ठ रोग 100 प्रतिशत उपचार योग्य है।
डिप्टी मास मीडिया अधिकारी डॉ. तृप्ता देवी ने बताया कि धब्बों की संख्या के आधार पर कुष्ठ रोग को निम्न श्रेणी या उच्च श्रेणी के कुष्ठ रोग में विभाजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग का सबसे बड़ा नुकसान शरीर का विकृत हो जाना है।इसे रोकने के लिए शरीर पर तेल और पानी से मालिश करने से त्वचा सूखने से बच जाती है। हाथ और पैर आधे घंटे तक पानी में डूबे रहने चाहिए। कमजोर हिस्से के लिए निर्धारित सहायक व्यायाम प्रतिदिन किया जाना चाहिए। यदि किसी भी मरीज को अपनी त्वचा पर इस तरह का निशान दिखाई दे जो सुन्न हो और ठीक न हो रहा हो तो उन्हें तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच करानी चाहिए।
प्रिंसिपल डॉ. सविता गुप्ता ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जो संदेश आप तक बहुत ही ਜ਼प्रभावी तरीके से पहुंचा है, उसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं ताकि लोग इस बीमारी और इसके उपचार के प्रति जागरूक हो सकें। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए इस प्रकार के सूचनात्मक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी सहयोग का आश्वासन दिया।